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योगी सरकार के ‘जाति’ वाले फैसले पर संजय निषाद ने जताई नाराजगी, बोले- प्रतिबंध लगाना सही नहीं

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जाति आधारित रैलियों, कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी लगा दी है. इसके साथ ही अब पुलिस एफआईआर, अरेस्ट मेमो, सार्वजनिक जगहों और सरकारी डॉक्यूमेंट्स में भी किसी की जाति नहीं लिखी जाएगी. सरकार के इस फैसले से विवाद पैदा हो गया है. जाति आधारित संगठनों इस पर नाराजगी जाहिर की, तो इधर विपक्ष दल भी सवाल खड़े कररहे हैं. वहीं अब सरकार के इस आदेश का एनडीए के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है.

निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है. उन्होंने सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट जाएं या इसका समाधान करें. उन्होंने कहा कि जातीय कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं है. उनका कहना है कि वो इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखेंगे साथ ही BJP आलाकमान को भी पत्र लिखेंगे.

‘सरकार को जातियों के साथ खड़े होना चाहिए’

बुधवार (24 सितंबर) को कानपुर में संजय निषाद ने कहा कि इस मामले पर सरकार को जातियों के साथ खड़े होना चाहिए नहीं तो इससे नुकसान होगा. उन्होंने ये भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट भी जाना चाहिए. मंत्री ने सवाल किया कि अगर सामाजिक जागरूकता के लिए किसी जाति का कार्यक्रम होता है तो उसको कैसे प्रतिबंधित कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि ये तो उनका संवैधानिक अधिकार है जिन्हें सदियों से दबाया कुचला और लूटा गया है.

‘ये तुगलकी फरमान है…’

वहीं अपनी जनता पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने योगी सरकार के इस फैसले को तुगलकी फरमान करार दिया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात भी कह डाली. मौर्या ने कहा है कि सामाजिक जागरूकता के लिए जातियों के कार्यक्रम होते हैं उस पर रोक कैसे लगाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर अपराधी सामान्य वर्ग के होते हैं जिन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है ऐसे लोगों को बचाने के उद्देश्य से ये नियम बनाए गए हैं.

‘हाई कोर्ट के आदेश का दुरुपयोग किया’

हाई कोर्ट के आदेश पर स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा है कि वो हाई कोर्ट का सम्मान करते हैं और कोर्ट के आदेश में कहीं भी गलत मंशा नहीं दिखती लेकिन सरकार ने अपने राजनीतिक हित को साधने के लिए आदेश का गलत इस्तेमाल किया है. उन्होंने कहा कि यह सिंगल बेंच का निर्णय है उसे डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट तक ले कर जा सकते थे. उन्होंने कहा कि सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश का दुरुपयोग किया है. योगी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस सरकार में पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और दलितों का उत्पीड़न हो रहा है. इसे छिपाने के लिए जाति का जिक्र हटाना चाहते हैं.

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