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बरेली में फिर सुर्खियों में सिटी मजिस्ट्रेट आवास… 23 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया

बरेली में फिर सुर्खियों में सिटी मजिस्ट्रेट आवास… 23 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया

उत्तर प्रदेश के बरेली में एडीएम कंपाउंड के अंदर बने सिटी मजिस्ट्रेट आवास का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. इस सरकारी आवास पर करीब 23 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया बताया गया, जिसको लेकर बिजली विभाग की तरफ से वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी. यहां तक की भू-राजस्व की तरह वसूली करने के लिए आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) भी जारी हो गई, लेकिन मामला ऊपर तक पहुंचते ही विभाग ने अपना ही पत्र वापस ले लिया.

बताया जा रहा है कि रामपुर गार्डन स्थित वाणिज्यिक अनुभाग-दो के अधिशासी अभियंता ने 27 जनवरी को जिलाधिकारी को एक संस्तुति पत्र भेजा था. इसमें सिटी मजिस्ट्रेट आवास के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक कार्यालय पर बकाया बिजली बिल की वसूली कराने की सिफारिश की गई थी. जैसे ही यह पत्र कलक्ट्रेट के संग्रह अनुभाग पहुंचा, वहां चर्चा शुरू हो गई. बाद में अन्य बकायेदारों की तरह इन दोनों स्थानों के नाम पर भी आरसी बनकर सदर तहसील पहुंच गई.

22.73 लाख बकाया

सूत्रों के मुताबिक सिटी मजिस्ट्रेट राजस्व (आवास) के नाम करीब 22.73 लाख रुपये से ज्यादा की बिजली बकायेदारी बताई गई, जबकि भाजपा कार्यालय पर लगभग 50 हजार रुपये का बिल बाकी बताया गया. सरकारी आवास के नाम इतनी बड़ी रकम बकाया होने की बात सामने आने पर प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. यह वही सरकारी आवास है, जहां कुछ समय पहले तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री रहते थे.

सरकारी आवास से हुई थी बयानबाजी

26 जनवरी को उन्होंने अचानक इस्तीफा देकर पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी. उसी दिन उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और प्रयागराज में शंकराचार्य और उनके अनुयायियों के कथित अपमान का मुद्दा उठाया था. उस समय इस सरकारी आवास से पोस्टरबाजी और बयानबाजी भी हुई थी, जिसकी काफी चर्चा रही. इसलिए यह पता पहले से ही राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से सुर्खियों में था. अब बिजली बिल बकाया का मामला सामने आने से फिर ध्यान इसी ओर चला गया.

अधिशासी अभियंता ने दी सफाई

मामला जब उच्च अधिकारियों तक पहुंचा तो बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता ने सफाई देते हुए कहा कि जिलाधिकारी को भेजा गया पत्र गलती से चला गया था. उन्होंने बताया कि उसी प्रक्रिया में कई अन्य बकायेदारों के खिलाफ भी आरसी जारी हुई थीं, इसलिए यह नाम भी शामिल हो गया. बाद में स्थिति स्पष्ट होने पर सिटी मजिस्ट्रेट आवास और भाजपा कार्यालय से संबंधित पत्र वापस करा लिया गया.

‘बिलिंग में तकनीकी दिक्कतें’

अधिशासी अभियंता का यह भी कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट आवास की बिलिंग में कुछ तकनीकी दिक्कतें भी हैं. आमतौर पर यहां से बिजली बिल जमा होता रहता है, इसलिए इसे गंभीर बकायेदारी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि, विभाग की इस सफाई के बाद भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बिना जांच के इतने बड़े सरकारी आवास के नाम आरसी कैसे जारी हो गई. फिलहाल आरसी वापस हो चुकी है, लेकिन यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर गया है.

स्थानीय स्तर पर लोग यही चर्चा कर रहे हैं कि अगर सरकारी आवासों का ही बिल समय पर क्लियर नहीं होगा तो आम जनता पर कार्रवाई किस आधार पर की जाएगी.

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