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बरेली में जहां गूगल मैप ने दिया था धोखा, अब वहीं 140 करोड़ की लागत से बनेगा पुल; जानें 2 साल पहले क्या हुआ था

उत्तर प्रदेश के बरेली बदायूं सीमा से जुड़े उस दर्दनाक हादसे को लोग आज भी नहीं भूले हैं, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था. करीब दो साल पहले गूगल मैप के भरोसे सफर कर रही एक कार आधे-अधूरे पुल से नीचे गिर गई थी. इस हादसे में कार सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी. मृतकों में दो सगे भाई नितिन और अमित के साथ उनका साथी अजीत शामिल था. तीनों नोएडा से शाहजहांपुर एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे और रास्ते में उन्होंने गूगल मैप का सहारा लिया था. रात का समय था और कार जैसे ही बरेली-बदायूं मार्ग पर रामगंगा नदी के पास पहुंची, गूगल मैप ने टूटे और अधूरे पुल को पूरा रास्ता दिखा दिया. अंधेरे में ड्राइवर को पुल के अधूरे होने का अंदाजा नहीं लग सका और कार सीधे नीचे गिर गई. हादसा इतना भयानक था कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला. अब राज्य सरकार ने इस पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी है.

हादसे के करीब छह दिन बाद बदायूं पुलिस ने गूगल को नोटिस जारी किया था. यह नोटिस गुरुग्राम स्थित गूगल के ऑफिस को भेजा गया था, जिसमें पुलिस ने उस इलाके के मैप मैनेजर की जानकारी मांगी थी. पुलिस का कहना था कि जिस जगह पुल टूटा हुआ था, उसे मैप में सही तरीके से क्यों नहीं दिखाया गया. इसी मामले में गूगल मैप के मैनेजर के साथ-साथ लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कुछ कर्मचारियों पर भी रिपोर्ट दर्ज की गई थी. लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर था कि लापरवाही की वजह से तीन जिंदगियां चली गईं.

140 करोड़ रुपए से बनेगा पुल

योगी सरकार ने बरेली और बदायूं के लोगों को बड़ी राहत देते हुए रामगंगा नदी पर दातागंज में नए पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी है. इस सेतु के लिए 140 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है. यह पुल बरेली और दातागंज के बीच बनेगा, जिससे लखनऊ, शाहजहांपुर, बरेली से बदायूं होकर आगरा जाने वालों का सफर आसान और तेज हो जाएगा.

सरकार ने दी मंजूरी

यह परियोजना लंबे समय से अटकी हुई थी, लेकिन अब वित्तीय समिति से हरी झंडी मिलने के बाद काम आगे बढ़ने की उम्मीद है. शासनादेश जारी होते ही बजट आवंटन किया जाएगा और निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इस पुल के बनने से उस जगह को डेथ पॉइंट के नाम से जानने की मजबूरी खत्म होगी, जहां पहले लोग डर के साये में सफर करते थे. वहीं पुल की मजबूती और भविष्य में बाढ़ के खतरे को देखते हुए आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ इंजीनियरों से तकनीकी अध्ययन कराया गया था. उनकी रिपोर्ट में पुल की लंबाई बढ़ाने की सिफारिश की गई थी. इसके बाद दातागंज सेतु की कुल लंबाई 850 मीटर तय की गई है, ताकि पुल के साथ-साथ दोनों ओर के पहुंच मार्ग भी सुरक्षित रहें और आवागमन में कोई परेशानी न हो.

जल्द शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया

वहीं लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर अजय कुमार ने बताया कि सेतु के पुनर्निर्माण और विस्तार को लेकर तैयार किए गए खाके की वित्तीय समिति ने चरणबद्ध जांच की. सभी आपत्तियों का समाधान होने के बाद अब परियोजना को अंतिम मंजूरी मिल गई है. नई तकनीक से पुल का निर्माण किया जाएगा और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की तैयारी है. इस पुल के बन जाने से बदायूं, बरेली और लखनऊ के बीच यात्रा न सिर्फ सुरक्षित होगी, बल्कि लोगों का समय भी बचेगा. हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों के जख्म तो नहीं भरेंगे, लेकिन उम्मीद है कि आगे किसी और को ऐसी कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी.

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