उत्तर प्रदेशभारत

न डॉक्टर, न दवा, सिर्फ कश… बागपत में ‘सिगरेट वाले बाबा’ का अजब-गजब दरबार, धुएं से करते हर मर्ज का इलाज

बागपत जिले के दोघट थाना क्षेत्र में इन दिनों एक अनोखा और चौंकाने वाला दरबार लोगों के बीच चर्चा का सबसे गर्म मुद्दा बना हुआ है. यहां न कोई डॉक्टर है, न कोई दवा और न ही किसी जांच की जरूरत… इलाज होता है सिर्फ सिगरेट के धुएं से. लोग इसे आस्था का चमत्कार बता रहे हैं तो कई इसे खुला अंधविश्वास और अवैध वसूली का खेल मान रहे हैं. इस दरबार के केंद्र में हैं सिगरेट वाले बाबा, जिनका असली नाम सुरेंद्र उर्फ शौकीन बताया जा रहा है.

बताया जाता है कि करीब एक साल पहले तक बाबा बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग पर सड़क किनारे मूंगफली बेचकर अपना गुजारा करते थे, लेकिन अचानक उनकी किस्मत और पहचान बदल गई. मूंगफली बेचने वाले बाबा अब सिगरेट के धुएं से सिरदर्द, बुखार, बदन दर्द, रोजगार संकट, पारिवारिक कलह और यहां तक कि भूत-प्रेत तक ठीक करने का दावा कर रहे हैं. दिल्ली, हरियाणा और बागपत समेत आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दरबार में पहुंच रहे हैं.

100 से लेकर 300 रुपए बाबा की फीस

दरबार की व्यवस्था भी पूरी तरह तय और व्यवस्थित है. दर्शन से पहले पर्चा कटता है. सामान्य पर्चा ₹100 और इमरजेंसी पर्चा ₹300 तक. पर्चा काटने का काम छह युवक करते हैं. नंबर आने पर श्रद्धालु को बाबा के सामने बैठाया जाता है. करीब 30 से 40 सेकंड तक भजन बजता है और बाबा गर्दन घुमाते हुए माहौल को रहस्यमय बना देते हैं. भजन बंद होते ही बाबा श्रद्धालु की समस्या सुनते हैं और फिर सिगरेट का कश लेकर सीधे धुआं छोड़ देते हैं. धुआं लगते ही संकट खत्म होने का दावा किया जाता है.

प्रसाद के रूप में चढ़ता है सिगरेट

एक और हैरान करने वाला पहलू यह है कि बाबा के यहां प्रसाद के रूप में सिगरेट और बतासे चढ़ाए जाते हैं, लेकिन श्रद्धालु इन्हें बाहर से नहीं ला सकते. प्रसाद बाबा की अपनी दुकान से ही खरीदना अनिवार्य है. बताया जा रहा है कि इलाज के नाम पर रोजाना अच्छी-खासी रकम वसूली जा रही है. दरबार में वीडियोग्राफी पर रोक है.

बाबा खुद 8वीं पास

बता दें कि बाबा खुद 8वीं पास बताए जा रहे हैं और किसी भी सिद्ध या धार्मिक परंपरा से जुड़े होने का दावा नहीं करते, लेकिन वहां आए लोगों का कहना है कि धुएं में ही हर बीमारी का इलाज है. सवाल यह उठ रहा है कि यह आस्था का मामला है या खुलेआम अंधविश्वास और धोखाधड़ी. सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर प्रशासन इस पूरे मामले पर कब संज्ञान लेगा.

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