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क्या जौनपुर में वोट चोरी हुई? अखिलेश यादव के आरोप पर वोटर्स ने दिया ये जवाब

क्या जौनपुर में वोट चोरी हुई? अखिलेश यादव के आरोप पर वोटर्स ने दिया ये जवाब

सपा प्रमुख अखिलेश यादव.

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के वोट चोरी के आरोप के बाद ब्यूरोक्रेट्स पलटवार करने के लिए मैदान में उतरे थे. जौनपुर, कासगंज और बारांबकी के जिलाधिकारियों ने अखिलेश जो जवाब देते हुए आरोपों को भ्रामक और निराधार बताया था. दरअसल, बीते दिन अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक और पोस्ट करके यह लिखा था कि जौनपुर की शाहगंज विधानसभा में कुर्मी, मौर्य, बेनवंशी और पाल समाज के वोटो की डकैती की गई. उन्होंने कुछ वोटरों का शपथपत्र और नाम भी शेयर किया था. TV9 ने जब अखिलेश यादव के इन दावों की पड़ताल की तो मामला चौंकाने वाला आया. वोटरों ने अखिलेश यादव के आरोपों को सही बताया.

अखिलेश यादव का पोस्ट

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा, भाजपा ने पीडीए समाज का वोट कटवाकर या कुछ समय के लिए हटवाकर वोट का हक छीना था. अब पीडीए समाज ने ठान लिया है कि वो भाजपा को हमेशा के लिए ही हटा देगा. न चलेगी हकमारी, न मतमारी, इस बार PDA सरकार हमारी.

इस पर TV9 से बातचीत में वोटर्स ने कहा, अखिलेश यादव के आरोप सही हैं. बीएलओ द्वारा पर्ची मिली लेकिन पोलिंग बूथ पर गए तो अंदर पीठासीन अधिकारी की वोटर लिस्ट में नाम नहीं था. वोट नहीं देने दिया गया. आज शाहगंज तहसील के SDM, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और लेखपाल जांच करने आए थे. बोले आपका नाम कटा नहीं है, किसी ने गलती से वो पेज फट गया होगा. आगे से ऐसी गड़बड़ी नहीं होगी.

अखिलेश के पोस्ट के बाद जांच करने पहुंचे अधिकारी

गांववालों ने बताया कि अखिलेश यादव के पोस्ट के बाद आज एसडीएम, तहसीलदार और लेखपाल आए थे. 2022 के विधानसभा चुनाव में जो लोग पर्ची मिलने के बावजूद वोट नहीं दे पाए थे उनसे अधिकारियों ने कहा आप लोगों का नाम कटा नहीं है, वोटर लिस्ट में है. किसी गलती से वो पेज फट गया होगा इसलिए नहीं दे पाए. अगली बार से ऐसा नहीं होगा.

एक ही गाड़ी में बैठकर भागे SDM समेत सभी अधिकारी

TV9 की टीम जब रामपुर के ग्राम सचिवालय पर पहुंची तो उसे देखते ही शाहगंज के SDM, तहसीलदार समेत सभी अधिकारी वहां से अपनी गाड़ी छोड़कर एक ही गाड़ी में बैठकर निकल गए. महिला लेखपाल से जब टीवी9 ने सत्यापन के बारे में पूछा तो वह भी बिना कुछ बोले गाड़ी में बैठीं और शीशा बंद करके निकल गईं. वहीं, मतदाताओं का आरोप है कि अधिकारियों ने यह खुद लिखकर सिग्नेचर कराया कि आपका नाम वोटर लिस्ट में है कटा नहीं है, उन्हें किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं है.

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