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कोई इतनी ऊंचाई से लाइट कैसे चुरा सकता है? ये क्या बोल गए अयोध्या कमिश्नर | Ayodhya Bamboo Lights and gobo projector Vanished from lamps, commissioner how can this happen?

कोई इतनी ऊंचाई से लाइट कैसे चुरा सकता है? ये क्या बोल गए अयोध्या कमिश्नर

अयोध्या राम पथ

बीते कई दिनों से राम नगरी अयोध्या चर्चा में है, लेकिन ये अच्छी बात की चर्चा नहीं है. चाहें वह पहली बारिश के बाद सड़कों पर गड्ढे बनने की हो या फिर भक्तिपथ और रामपथ पर लगी लाइट्स और गोबो प्रोजेक्टर गायब होने का मामला. इन सभी चीजों को लेकर अयोध्या में हुए निर्माण कार्यों पर सवाल उठने लगे हैं. अयोध्या में भक्तिपथ और रामपथ पर लगी लाइट्स और गोबो प्रोजेक्टर गायब हुए हैं. मामला तब सामने आया जब कॉन्ट्रेक्टर ने इसकी शिकायत पुलिस से की. लेकिन अब कमिश्नर कह रहे हैं कि कोई इतनी ऊंचाई से लाइट कैसेचुरासकताहै?

जानकारी के मुताबिक यश इंटरप्राइजेज के कर्मचारी शेखर शर्मा ने थाना राम जन्मभूमि में इस मामले की एफआईआर दर्ज करवाई थी जिसमें अनजान शख्स के खिलाफ शिकायत की गई थी कि रामपथ और भक्तिपथ पर लगे बैंबू लाइट और गोबो प्रोजेक्टर लाइट गायब हुए हैं. लाइट्स की चोरी की वारदात के बाद पुलिस भी असमंजस की स्थिति में है क्योंकि यह सभी लाइट्स शहर के मुख्य रास्तों पर लगाई गई हैं.

कहां कितनी लाइट्स थीं?

इन लाइट्स के लगने के बाद राम नगरी के रास्ते रोशन हो गए थे, लेकिन कर्मचारी शेखर शर्मा के मुताबिक, किसी ने इन्हें चुरा लिया है. शर्मा ने अपनी दी गई शिकायत में बताया है कि राम नगरी के राम पथ पर कुल 6400 बैंबू लाइट्स लगी थीं. वहीं भक्ति पथ पर 96 गोबो प्रोजेक्टर लाइट्स लगे हैं. हाल ही में जब काउंटिंग की गई तो लाइट्स के गायब होने का मामला सामने आया. शेखर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि रामपथ और भक्तिपथ पर लगी लाइट्स में से कुल 3800 बैंबू लाइट्स और 36 गोबो लाइट प्रोजेक्टर गायब हैं.

‘कोई इतनी ऊंचाई से लाइट कैसे चुरा सकता है?’

एफआईआर की बात की जाए तो इसमें कहा गया है कि लाइट गायब होने का पता मई महीने में चल गया था लेकिन मुकदमा अब हुआ है. वहीं इस मामले पर कमिश्नर का कहना है कि कोई इतनी ऊंचाई से लाइट कैसे चुरा सकता है? फिलहाल इस मामले में जांच की जा रही है. वहीं लाइट्स की चोरी की घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है. कई लोग इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ इसे चोरी बता रहे हैं. वहीं कई लोग अंधाधुंध विकास में बरती गई लापरवाही बता रहे हैं.

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