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केवल लिव-इन में रहने वाली महिलाओं का ही कानून सम्मान कर रहा है, करोड़ों हिंदुओं का नहीं… अनिरुद्धाचार्य का दो टूक जवाब

केवल लिव-इन में रहने वाली महिलाओं का ही कानून सम्मान कर रहा है, करोड़ों हिंदुओं का नहीं... अनिरुद्धाचार्य का दो टूक जवाब

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज

मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज पिछले कुछ दिनों से लगातार मीडिया में छाए हुए हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ समय पहले ही उन्होंने लड़कियों की शादी की उम्र और उनके कैरेक्टर पर सवाल उठाए थे. विवादास्पद बयानों के बाद जब अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ पूरे देश में कई जगहों पर महिला संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इसी मुद्दों पर TV9 भारतवर्ष ने अनिरुद्धाचार्य से खास बातचीत की जिसके जवाब में चलिए जानते हैं उन्होंने क्या कहा?

अनिरुद्धाचार्य से बातचीत के दौरान जब शादी की उम्र पर सवाल किया गया और लड़कियों के कैरेक्टर पर सवाल उठाने की बात कही गई तो उन्होंने दो टूक कहा कि उन्होंने जो बयान दिया था वह कुछ लड़कियों और लड़कों के लिए ही था. सभी के लिए वह बयान नहीं था. जब बाल-विवाह जैसी गैर कानूनी कुप्रथा और स्वतंत्रता का हवाला देकर कानून की बात कही गई तो अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि कानून सिर्फ लिव-इन में रहने वाली महिलाओं की भावनाओं का ही सम्मान कर रहा है न कि करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का. उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से गोहत्या की जा रही है लेकिन अब तक उस पर कानून नहीं बना है. जबकि गोमाता से करोड़ों हिंदुओं की आस्थाएं जुड़ी हैं.

अभद्र भाषा के इस्तेमाल भी बोले अनिरुद्धाचार्य

अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपने बयान में इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा के सवाल पर कहा कि जब मां अपने बच्चों को किसी गलत बात पर डांटती है तो उस वक्त भाषा कठोर ही होती है. उन्होंने यह भी कहां कि बच्चा गलती करे तो मां जिस गाल पर प्यार करती है उसी गाल पर थप्पड़ भी मारती है. ऐसे में गुरु की भी जिम्मेदारी हो जाती है कि वह अपने शिष्यों को सही राह पर लाएं और जरूरत पड़े तो उन्हें डांटे भी.

कठोर भाषा से ही मुद्दे पर चर्चा

अनिरुद्धाचार्य ने अपने महिला विरोधी बयान पर कहा कि उनकी भाषा कठोर थी इसलिए आज यह मुद्दा चर्चा का विषय बना है. इस दौरान उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि उनके शब्द कड़वे थे. हालांकि इसके पक्ष में अनिरुद्धचार्य ने कहा कि अगर उनके शब्द कड़वे न होते तो इस मुद्दे पर चर्चा भी नहीं हो रही होती. इस दौरान उन्होंने यह हवाला भी दिया कि वह गांववालों की भाषा बोलते हैं क्योंकि वह गांव के रहने वाले हैं.

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