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ईरान की नतान्ज फैसिलिटी में हुआ नुकसान, जवाबी हमलों ने दुबई को किया तबाह, कैसे मिडिल ईस्ट में इतना फेमस हुआ दुबई

अमेरिका इजरायल और ईरान की जंग आज चौथे दिन भी जारी है. इस सप्ताह जारी की गई सैटेलाइज तस्वीरों में ईरान की मेन न्यूक्लियर फैसिलिटी नतान्ज में हुए नुकसान का पता चला है. कोलोराडो स्थित इमेजिंग कंपनी वैंटोर (जिसे पहले मैक्सार टेक्नोलॉजीज के नाम से जाना जाता था) द्वारा मंगलवार को ली गई तस्वीरों में नटांज परिसर की कई इमारतें पिछले दिन ली गई तस्वीरों की तुलना में अधिक क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही हैं.

सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि सुविधा केंद्र में भयंकर ब्लास्ट हुआ है. इनमें वो स्ट्रक्चर भी शामिल हैं जिनके बारे में माना जाता है कि उनमें कर्मचारी रहते थे और अंडरग्राउंड फ्यूल कॉम्पलेक्स से जुड़े वाहनों के प्रवेश द्वार भी शामिल हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने भी इस नुकसान की पुष्टि की है. 

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने क्या बताया
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने कहा कि अमेरिका-इजरायल हमले के बाद नतान्ज़ संवर्धन स्थल को हाल ही में कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि किसी भी तरह के रेडियोलॉजिकल नुकसान की आशंका नहीं है. तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित नतान्ज ईरान की मुख्य  यूरेनियम एनरिचमेंट फैसिलिटी है और उसके परमाणु कार्यक्रम का एक केंद्रीय स्तंभ है.

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में मिडिल ईस्ट के कई देशों में अमेरिकन बेस पर हमले किए. अमेरिका के साथ दोस्ती का सबसे ज्यादा दुष्परिणाम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को झेलना पड़ रहा है, जिसका शानदार शहर दुबई ईरानी हमलों से पस्त दिख रहा है. दशकों से दुबई को जगमगाती इमारतों, टैक्स फ्री सैलरी, बिजनेस करने में आसानी और सबसे बड़ी बात मिडिल ईस्ट में कहीं भी हो रही घटनाओं से अछूते रहने वाले शहर के रूप में जाना जाता था, लेकिन शनिवार को हुए हमलों ने सब कुछ बदलकर रख दिया. 

हमलों में दुबई तबाह
ईरान के जवाबी हमलों का असर दुबई के एयरपोर्ट खासकर पाम जुमेराह और बुर्ज अल अरब होटल जैसे प्रतिष्ठित स्थलों और बंदरगाहों पर भी पड़ा. ऐसे दृश्य जिन्हें शायद ही किसी ने अपने जीवनकाल में देखने की कल्पना की होगी, खासकर उस शहर के लिए जिसने 4 दशकों तक एक अस्थिर पड़ोस में बिजनेस करने के लिए दुनिया के सबसे भरोसेमंद स्थानों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई.

कैसे इतना फेमस हुआ दुबई
दुबई का मोती और मछली पकड़ने के बंदरगाह से ग्लोबल फाइनेंशियल हब बनने का सफर दशकों की मेहनत का नतीजा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 1985 में एमिरेट्स एयरलाइन की शुरुआत, 1999 में बुर्ज अल अरब का उद्घाटन और 2000 के दशक की शुरुआत में संपत्ति कानूनों द्वारा पहली बार विदेशी स्वामित्व की अनुमति ये सभी मिलकर ब्रांड दुबई के पिलर बने.

आज, तेल का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो प्रतिशत से भी कम योगदान है. व्यापार, पर्यटन और वित्तीय सेवाएं जो ब्रिटेन के लंदन और अमेरिका के न्यूयॉर्क के मॉडल पर आधारित नियमों पर बनी हैं वो यूएई की अर्थव्यवस्था को गति देती हैं. पड़ोसी शहर अबू धाबी जहां संयुक्त अरब अमीरात के 90 प्रतिशत से अधिक तेल भंडार स्थित हैं, अभी भी जलकार्बन पर अधिक निर्भर है.

बेरुत कभी मिडिल ईस्ट की वित्तीय राजधानी हुआ करता था, लेकिन 1970 के दशक में हुए गृहयुद्ध ने इसकी प्रतिष्ठा को चकनाचूर कर दिया. बहरीन ने इस स्थान को भरा और फिर दुबई ने इसे पीछे छोड़ दिया. ये सब आज के दुबई की तरह उस समय क्षेत्रीय उथल-पुथल के बीच स्थिर थे. दुबई ने इस वादे को पहले के किसी भी शहर से कहीं अधिक जिम्मेदारी संग निभाया.

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