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इंटरनेशनल ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश, ED ने 7 राज्यों में 26 ठिकानों पर मारा छापा, 3 करोड़ कैश और ड्रग्स बरामद

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इंटरनेशनल ड्रग सप्लाई और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, ओडिशा और दिल्ली में कुल 26 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया.

ये कार्रवाई गोवा पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल की ओर से NDPS Act के तहत दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें बड़े पैमाने पर ड्रग्स की तस्करी और सप्लाई का आरोप लगा था.

ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?

ED की कार्रवाई मधुपन एसएस और उसके नेटवर्क पर केंद्रित थी, जो देश और विदेश में अवैध ड्रग्स की सप्लाई और उससे कमाई गई रकम को मनी लॉन्ड्रिंग चैनल के जरिए छिपाने का काम करता था. जांच में यह भी सामने आया कि ये नेटवर्क एक संगठित इंटर-स्टेट ड्रग ट्रैफिकिंग सिंडिकेट की तरह काम करता था, जिसमें गोवा, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा और केरल जैसे राज्यों तक डिस्ट्रीब्यूशन की पुष्टि हुई है.

ड्रग्स बरामद होने पर ED ने NCB को बुलाया

ED ने 7 राज्यों के 26 ठिकानों पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान करीब 3 करोड़ रुपये नकद, कुछ इनक्रिमिनेटिंग डॉक्यूमेंट्स और कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए. कई ठिकानों पर ड्रग्स भी मिले. जिसके बाद ED ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और लोकल पुलिस के साथ मिलकर मौके पर तुरंत कार्रवाई कराई. इस नेटवर्क से जुड़े एक आरोपी मधुपन एसएस को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है.

डिजिटल उपकरणों की जांच में मिले कई अहम सबूत

डिजिटल डिवाइस की जांच में ED को ऐसे सबूत मिले है जिनसे पता चलता है कि ड्रग्स की सप्लाई MDMA, इक्सटेसी (Ecstasy), हश, कुश, स्रुम्स, कोकेन जैसे पदार्थों की होती थी और उसे B2B मॉडल पर विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था. इसके लिए कूरियर और पोस्टल चैनल का भी इस्तेमाल किया जाता था, ताकि सप्लाई चेन बिना चेहरे और पहचान के चल सके.

वहीं, रकम को UPI, बैंक ट्रांसफर, क्रिप्टो और नकद के जरिए घुमाकर छिपाया जा रहा था, ताकि असली स्रोत और लाभार्थी पकड़ में न आए. ED ने मधुपन एसएस को गिरफ्तार किया और बाद में गोवा की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे सात दिन की ED कस्टडी में भेज दिया गया.

आगे की कार्रवाई में जुटी है ईडी

ED के अनुसार, ये ऑपरेशन सिर्फ ड्रग सप्लाई चेन को नहीं, बल्कि उसके फाइनेंशियल नेटवर्क को भी खत्म करने का हिस्सा है, ताकि ऐसे गिरोहों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग करना मुश्किल हो जाए. एजेंसी अब इस रैकेट में शामिल सप्लायर, फाइनेंसर, फैसिलिटेटर और विदेशी लिंक की पहचान करने में जुटी है. साथ ही अवैध कमाई से खरीदी गई संपत्तियों को ट्रेस और अटैच करने की प्रक्रिया भी जारी है.

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