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अपराधी ढेर, माल बरामद… फिर भी लॉकर धारकों को अपने गहने पाने के लिए क्यों करनी पड़ेगी मशक्कत?

अपराधी ढेर, माल बरामद... फिर भी लॉकर धारकों को अपने गहने पाने के लिए क्यों करनी पड़ेगी मशक्कत?

इंडियन ओवरसीज बैंक

उत्तर प्रदेश में लखनऊ के इंडियन ओवरसीज बैंक में 42 लॉकर तोड़कर करोड़ों रुपये के माल की चोरी का खुलासा करने में पुलिस सफल रही है. पुलिस ने दावा किया है कि चोरी का माल बरामद हो चुका है. वारदात को अंजाम देने वाले दो बदमाश मुठभेड़ में मारे गए हैं, वहीं तीन अन्य बदमाश पकड़े गए हैं. इस खबर से लॉकर धारक खुश तो हैं, लेकिन समस्या यह है कि लॉकर से चोरी हुआ माल उन्हें मिलेगा कैसे? यह सवाल इसलिए भी लाजमी है कि बदमाशों के पास से बरामद सारा माल अब कोर्ट प्रापर्टी बन चुका है.

नियमानुसार यह सारा माल लॉकर धारकों को वापस कर दिया जाएगा. लेकिन इसके लिए लॉकर धारकों को कोर्ट में साबित करना पड़ेगा कि उनके लॉकर में क्या और कितना रखा था. यही नहीं, उन्हें अपने सामान का वापस पाने के लिए बिल बाउचर भी पेश करना होगा, जिससे साबित हो सके कि बरामद माल उन्हीं का है. यह समस्या इसलिए भी आ सकती है कि इसमें बैंक कोई हस्तक्षेप नहीं करने वाला. लखनऊ के डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह के मुताबिक बैंक में चोरी हुई थी. पुलिस ने चोरों को पकड़ लिया और माल बरामद कर कोर्ट को सौंप दिया.

जेवर के बिल दिखाना बड़ी चुनौती

अब लॉकर धारकों को कोर्ट में साक्ष्य देना है कि उनका कौन सा और कितना माल चोरी हुआ था. यह साबित करने के बाद कोर्ट उस माल को रिलीज कर देगा. कहने और सुनने में यह बात बहुत आसान लग रही है, लेकिन इसी में मुश्किल भी छिपी है. दरअसल लॉकर में ज्यादातर जेवर ही रखे थे. आम तौर पर लोगों के पास जेवर का कोई बिल बाउचर नहीं होता. दरअसल जेवर खरीदने पर सुनार कच्चा बिल देते हैं. इसके अलावा जेवर पुस्तैनी भी होता है, जिसका कोई बिल नहीं होता.

कोर्ट में दिखाने होंगे बिल और बाउचर

ऐसे में समस्या यह है कि लोग जेवर को अपना साबित करने के लिए कहां से बिल ले आएंगे. चूंकि लॉकर में रखे सामान की जानकारी बैंक को भी नहीं होती. ऐसे में बैंक भी अपने ग्राहकों की मदद नहीं कर पाएगा. ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर कांफ्रेंडरेशन के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट आरएन शुक्ला के मुताबिक इस मामले में क्लेम करने के साथ ही साक्ष्य भी देने होंगे. जैसे कि जेवर या कीमती सामान का बिल कोर्ट में दाखिल करना होगा. इसके बाद कोर्ट मिलान करने के बाद सामान को रिलीज कर देगा.

आसान नहीं है मालिकाना हक साबित करना

ऐसे मामलों में कोर्ट को भरोसा दिलाना बड़ी चुनौती हो सकता है कि बरामद माल उन्हीं का है. बैंक के ही एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में तो अभी देखना है कि पुलिस कितना माल बरामद दिखाती है. उन्होंने बताया ऐसे हालात में लॉकर से सामान चोरी हुए सामान की वापसी भगवान भरोसे ही है. पहले लॉकर रूम के बाहर एक सुरक्षा गार्ड की तैनाती हमेशा रहती थी. बाद में रिजर्व बैंक ने इस व्यवस्था को ही खत्म कर दिया. ऐसे में लॉकर धारकों को अपने माल का मालिकाना हक कोर्ट में साबित करना ही होगा.



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